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भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ाव: विद्यालय प्रार्थना सभाओं में श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का समावेश

भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा को विद्यालयी शिक्षा से जोड़ने की दिशा में उत्तराखंड के शिक्षा विभाग द्वारा एक सराहनीय कदम उठाया गया है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निर्देशानुसार, राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौरखाल में प्रतिदिन प्रार्थना सभा के माध्यम से श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का सामूहिक उच्चारण कराया जा रहा है। यह पहल न केवल छात्रों की बौद्धिक और भाषिक क्षमताओं को निखार रही है, बल्कि उनमें नैतिक मूल्यों और आत्मबोध का विकास भी कर रही है।

विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्रीमती नंदा रावत बताती हैं कि हर दिन की शुरुआत गीता के चयनित श्लोकों के सामूहिक उच्चारण से होती है। इन श्लोकों का उच्चारण विद्यार्थियों की भाषा, उच्चारण, स्मरण शक्ति तथा ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को तो बढ़ाता ही है, साथ ही यह अभ्यास उन्हें कर्तव्यबोध, आत्मसंयम, निष्ठा और आध्यात्मिक संतुलन जैसे जीवन मूल्यों से भी जोड़ता है। विद्यालय के शिक्षक डा अतुल बमराडा इन श्लोकों का सरल हिंदी में अर्थ भी विद्यार्थियों को समझाते हैं, जिससे कि छात्र गीता के गूढ़ दार्शनिक विचारों को अपने व्यावहारिक जीवन में आत्मसात कर सकें। इससे छात्रों में संस्कार, आत्मबोध और भारतीय वैदिक परंपरा के प्रति गौरव की भावना का भी विकास हो रहा है।

यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप है, जिसमें भारतीय परंपराओं, मूल्यों और ज्ञान तंत्र को विद्यालयों में समावेशित करने पर विशेष बल दिया गया है। गीता के श्लोक विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण, भावनात्मक स्थिरता और कर्तव्य परायणता जैसे गुणों के विकास में अत्यंत सहायक सिद्ध हो रहे हैं।

इस नवाचार को न केवल विद्यालय प्रशासन और छात्रों से सहयोग मिल रहा है, बल्कि अभिभावकों एवं स्थानीय समुदाय द्वारा भी इसे भरपूर समर्थन और सराहना प्राप्त हो रही है। यह पहल निस्संदेह राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौरखाल को भारतीय ज्ञान परंपरा के क्रियान्वयन में एक सशक्त और अनुकरणीय उदाहरण बनाती है।

यह गतिविधि हमें यह सोचने के लिए प्रेरित करती है कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि मूल्यपरक जीवन निर्माण का भी माध्यम है। श्रीमद्भगवद्गीता जैसे ग्रंथों से जुड़ना, हमारी नई पीढ़ी को न केवल ज्ञानी, बल्कि संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में आगे बढ़ाना है।

Office Order Regarding Bhagwad Gita Chanting


 
 
 

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